तेज, क्षमा, धैर्य, पवित्रता, किसी से द्रोह न रखना और अत्यधिक अभिमान का न होना — हे भारत, ये गुण उसमें होते हैं जो दैवी सम्पदा को लेकर जन्मा है।
व्याख्या
कृष्ण अर्जुन से दैवी सम्पदा (दैवी सम्पद्) के गुणों की सूची आगे बढ़ाते हैं, जो शुभ की ओर झुके स्वभाव वाले व्यक्ति के लक्षण हैं। यहाँ वे तेज, क्षमा, धैर्य (धृति), पवित्रता (शौच), द्रोह का अभाव (अद्रोह) और अति-अभिमान का अभाव गिनाते हैं। "अभिजात" का अर्थ पूर्वजन्मों से मिला जन्मजात स्वभाव है या ऐसी प्रवृत्ति जिसे कोई भी विकसित कर सकता है, इस पर टीकाकारों में मतभेद है।