श्रीकृष्ण
तस्मादोमित्युदाहृत्य यज्ञदानतपःक्रियाः । प्रवर्तन्ते विधानोक्ताः सततं ब्रह्मवादिनाम् ॥
tasmādomityudāhṛtya yajñadānatapaḥkriyāḥ | pravartante vidhānoktāḥ satataṃ brahmavādinām ||
इसलिए ब्रह्म को जानने और उसका उपदेश करने वाले लोग शास्त्र में बताई गई विधि के अनुसार यज्ञ, दान और तप के कर्म सदा "ॐ" का उच्चारण करके ही आरंभ करते हैं।
व्याख्या कृष्ण "ॐ तत् सत्" को ब्रह्म का नामनिर्देश बताते हुए यहाँ "ॐ" की भूमिका समझाते हैं। ब्रह्मवादी (ब्रह्म का वर्णन करने वाले) शास्त्रविधि के अनुसार यज्ञ, दान और तप (तपस्या) को "ॐ" कहकर आरंभ करते हैं, जिससे कर्म पवित्र और समर्पित हो जाता है।
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भगवद्गीता के बारे में
भगवद्गीता, संस्कृत में श्रीमद्भगवद्गीता (Śrīmad Bhagavad Gītā ), अर्थात् “भगवान का गीत”, महाभारत के भीष्म पर्व का एक संवाद है, जिसमें 18 अध्याय और 700 श्लोक हैं। कुरुक्षेत्र के युद्धक्षेत्र में, युद्ध आरंभ होने से ठीक पहले, अपने ही स्वजनों से लड़ने के विचार से अर्जुन का मन टूट जाता है, और उसके सारथी श्रीकृष्ण उसे उत्तर देते हैं: कर्तव्य पर, फल की आसक्ति के बिना कर्म करने पर, ज्ञान, ध्यान और भक्ति पर। संजय यह संवाद नेत्रहीन राजा धृतराष्ट्र को सुनाते हैं। इसे भगवद् गीता, भगवत गीता, श्रीमद् भगवद् गीता या श्रीमद्भगवद्गीता भी लिखा जाता है, और प्रायः केवल गीता कहा जाता है।
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