हर व्यक्ति को जो भोजन प्रिय होता है, वह भी तीन प्रकार का होता है। इसी तरह यज्ञ, तप और दान भी तीन प्रकार के होते हैं। अब उनके इस भेद को सुनो।
व्याख्या
अर्जुन ने पूछा था कि शास्त्र-विधि छोड़कर श्रद्धा से पूजा करने वालों की निष्ठा कैसी होती है; उसी उत्तर को आगे बढ़ाते हुए कृष्ण अब तीन गुणों को रोज़मर्रा की पसंद पर लागू करते हैं। ये गुण हैं सत्त्व (निर्मलता), रजस (आवेग) और तमस (जड़ता)। वे पहले भोजन (आहार) को लेते हैं, फिर यज्ञ, तप और दान को; अगले श्लोकों में हर एक का भेद बताया गया है।