सूर्य में जो तेज है, जो पूरे जगत को प्रकाशित करता है, और जो तेज चन्द्रमा में है तथा जो अग्नि में है — उस तेज को तुम मेरा ही जानो।
व्याख्या
पिछले श्लोक में कृष्ण ने कहा कि साधना करने वाले योगी आत्मा को देख पाते हैं, पर अशुद्ध मन वाले नहीं। अब वे सबके देखने योग्य उदाहरण देते हैं: सूर्य, चन्द्रमा और अग्नि का प्रकाश। वे कहते हैं कि यह तेज उन्हीं का है, यानी संसार की सारी रोशनी का स्रोत परमात्मा है। व्याख्याकारों में मतभेद है कि इसे इन वस्तुओं की आंतरिक शक्ति के रूप में पढ़ा जाए या उनसे परे रहकर उन्हें धारण करने वाले ईश्वर के रूप में।