हे निष्पाप, इस प्रकार यह अत्यंत गोपनीय शास्त्र मैंने तुमसे कहा। हे भारत, इसे समझ लेने पर मनुष्य ज्ञानी हो जाता है और उसके सारे करने योग्य कर्म पूर्ण हो जाते हैं।
व्याख्या
अध्याय के अंत में कृष्ण अर्जुन को "अनघ" (निष्पाप) और "भारत" कहकर संबोधित करते हैं। वे पुरुषोत्तम के बारे में अभी दिए गए उपदेश को सबसे गोपनीय शास्त्र (गुह्यतम शास्त्र) कहते हैं। उनके अनुसार इसे सचमुच समझ लेने से व्यक्ति बुद्धिमान और कृतकृत्य, यानी जीवन का उद्देश्य पूरा कर चुका, हो जाता है। टीकाकारों में मतभेद है कि "यह शास्त्र" केवल इसी अध्याय को दर्शाता है या पूरी गीता को।