देह का स्वामी जीव जब कोई शरीर पाता है और जब उसे छोड़कर जाता है, तब इन (मन और इंद्रियों) को साथ लिए चलता है, जैसे हवा गंध को उसके स्थान से उठाकर अपने साथ ले जाती है।
व्याख्या
कृष्ण पिछले श्लोक की बात आगे बढ़ाते हैं: जीव उनका सनातन अंश है और मन तथा पाँच इंद्रियों को अपनी ओर खींचता है। यहाँ वे कहते हैं कि जीव जब एक शरीर छोड़कर दूसरा पाता है, तब इन्हें साथ ले जाता है, जैसे हवा किसी स्थान से गंध उठाकर साथ ले जाती है। यहाँ 'ईश्वर' शब्द देह और इंद्रियों के स्वामी जीव के लिए है, परमेश्वर के लिए नहीं; इस पर टीकाकार प्रायः एकमत हैं।