जब इस देह के सभी द्वारों में ज्ञान का प्रकाश उत्पन्न होता है, तब जानना चाहिए कि सत्त्व बढ़ा हुआ है।
व्याख्या
कृष्ण अर्जुन को बता रहे हैं कि अपने भीतर तीनों गुणों की पहचान कैसे की जाए। यहाँ सत्त्व (स्पष्टता और शुद्धता का गुण) का लक्षण है देह के सभी "द्वारों", यानी इंद्रियों और बोध की क्षमताओं, में ज्ञान का प्रकाश। टीकाकार इस ज्ञान को सामान्य स्पष्ट बोध मानते हैं या आध्यात्मिक अंतर्दृष्टि की ओर कदम, इस पर मतभेद है, पर सब इसे सत्त्व की वृद्धि का चिह्न मानते हैं।