सत्त्वात्सञ्जायते ज्ञानं रजसो लोभ एव च ।प्रमादमोहौ तमसो भवतोऽज्ञानमेव च ॥
sattvātsañjāyate jñānaṃ rajaso lobha eva ca |pramādamohau tamaso bhavato'jñānameva ca ||
सत्त्व से ज्ञान उत्पन्न होता है, रजस से लोभ जन्म लेता है, और तमस से असावधानी और मोह उत्पन्न होते हैं, तथा अज्ञान भी।
व्याख्या
कृष्ण अर्जुन को प्रकृति के तीन गुणों की व्याख्या जारी रखते हुए बताते हैं कि हर गुण मन में क्या पैदा करता है। सत्त्व (स्पष्टता और संतुलन) से ज्ञान उत्पन्न होता है, रजस (बेचैन ऊर्जा) से लोभ, और तमस (जड़ता, सुस्ती) से प्रमाद (असावधानी), मोह और अज्ञान उत्पन्न होते हैं।