जिनसे यह देह बनी है, उन तीनों गुणों को पार करके देहधारी जीव जन्म, मृत्यु, बुढ़ापे और दुःख से मुक्त हो जाता है और अमरता पा लेता है।
व्याख्या
कृष्ण अर्जुन को प्रकृति के तीन गुणों—सत्त्व, रजस् और तमस्—के बारे में समझा रहे हैं, जिनसे शरीर और मन बने हैं। जो इनसे ऊपर उठ जाता है, वह जन्म, मृत्यु, बुढ़ापे और दुख के चक्र से छूटकर अमरता (अमृत) पाता है। परंपराएँ इसे अलग ढंग से समझती हैं: अद्वैत इसे आत्मज्ञान से मिली मुक्ति मानता है, जबकि भक्ति परंपराएँ इसे ईश्वर की निकटता से जोड़ती हैं।