सत्त्व, रजस् और तमस् — ये तीन गुण प्रकृति से उत्पन्न होते हैं। हे महाबाहो, ये अविनाशी देही आत्मा को शरीर में बाँध देते हैं।
व्याख्या
कृष्ण प्रकृति के तीन गुणों की व्याख्या शुरू करते हैं: सत्त्व (प्रकाश, शुद्धता), रजस् (क्रियाशीलता, आवेग) और तमस् (जड़ता, अंधकार)। वे कहते हैं कि ये गुण प्रकृति से उपजते हैं, आत्मा से नहीं, फिर भी अविनाशी देही को शरीर से बाँध देते हैं। यह बंधन कितना वास्तविक है, इस पर परंपराओं में मतभेद है: कुछ वेदांत व्याख्याएँ इसे केवल आभासी मानती हैं, तो कुछ देहधारी जीवन की वास्तविक स्थिति।