mama yonirmahadbrahma tasmin garbhaṃ dadhāmyaham |saṃbhavaḥ sarvabhūtānāṃ tato bhavati bhārata ||
महान ब्रह्म मेरी योनि (गर्भ-स्थान) है; उसी में मैं गर्भ स्थापित करता हूँ। हे भारत, उसी से सब प्राणियों की उत्पत्ति होती है।
व्याख्या
कृष्ण अर्जुन को बताते हैं कि सृष्टि कैसे होती है। यहाँ "महद्ब्रह्म" को प्रायः वह विशाल मूल प्रकृति समझा जाता है, जो सब प्राणियों की योनि या गर्भ-स्थान है, और कृष्ण उसमें जीवन का बीज स्थापित करने वाले हैं। टीकाकार इस ब्रह्म को कोई अव्यक्त जड़ प्रकृति मानते हैं, तो कोई व्यापक ब्रह्मांडीय तत्त्व, पर सब मानते हैं कि सृष्टि कृष्ण के संकल्प से ही होती है।