कहा गया है कि भली-भाँति किए गए कर्म का फल सात्त्विक और निर्मल होता है; रजोगुण का फल दुःख है, और तमोगुण का फल अज्ञान है।
व्याख्या
कृष्ण अर्जुन को समझा रहे हैं कि प्रकृति के तीन गुण हमारे कर्मों के फल को कैसे ढालते हैं। सत्त्व (शुद्धता, स्पष्टता) का फल निर्मल है, रजस् (बेचैन आसक्ति) का फल दुःख है, और तमस् (जड़ता) का फल अज्ञान है। 'सुकृत' कर्म का अर्थ सामान्य शुभ कर्म है या सात्त्विक भाव से किया गया कर्म, इस पर टीकाकारों में भिन्न मत हैं, पर सभी हर गुण को उसके फल से जोड़ते हैं।