रजोगुण के बढ़ने पर देह त्यागने वाला कर्म में आसक्त लोगों के बीच जन्म लेता है, और वैसे ही तमोगुण में मरने वाला मूढ़ योनियों में जन्म लेता है।
व्याख्या
कृष्ण बता रहे हैं कि मृत्यु के समय जो गुण प्रबल होता है, उसी के अनुसार अगला जन्म मिलता है। रजोगुण (बेचैन, प्रवृत्ति-प्रधान ऊर्जा) में मरने वाला कर्मों में आसक्त (कर्मसङ्गी) लोगों में जन्म लेता है, और तमोगुण (जड़ता, अज्ञान) में मरने वाला मूढ़ योनियों में। परंपराएँ 'मूढ़ योनि' को कहीं पशु आदि जन्म, तो कहीं मनुष्यों में गहरे अज्ञान की अवस्था के रूप में समझती हैं।