जो लोग मेरा आश्रय लेकर बुढ़ापे और मृत्यु से मुक्ति के लिए प्रयत्न करते हैं, वे उस ब्रह्म को पूर्ण रूप से जान लेते हैं, तथा अध्यात्म और समस्त कर्म को भी जान लेते हैं।
व्याख्या
पिछले श्लोक में कृष्ण ने उन लोगों की बात की जिनके पाप समाप्त हो चुके हैं और जो दृढ़ निश्चय से उनका भजन करते हैं। यहाँ वे कहते हैं कि जो लोग उनका आश्रय लेकर बुढ़ापे और मृत्यु से मोक्ष (मुक्ति) पाना चाहते हैं, वे ब्रह्म (परम सत्य), अध्यात्म (आत्मा से जुड़ा तत्त्व) और कर्म (क्रिया) को जान लेते हैं। अगला श्लोक इन्हीं शब्दों को आगे बढ़ाता है। व्याख्याकार इस पर भिन्न मत रखते हैं: कुछ कृष्ण को ही साकार परमेश्वर और ब्रह्म मानते हैं, तो कुछ उन्हें निराकार ब्रह्म का संकेत करने वाला मानते हैं।