यह जान लो कि समस्त प्राणी इन्हीं दोनों प्रकृतियों से उत्पन्न होते हैं। मैं ही सम्पूर्ण जगत् की उत्पत्ति का कारण हूँ और उसी प्रकार उसके लय का भी।
व्याख्या
कृष्ण ने अभी दो प्रकृतियाँ बताई हैं: निम्न जड़ प्रकृति और उच्च जीवरूप प्रकृति, जो जगत् को धारण करती है। यहाँ वे कहते हैं कि सभी प्राणी इन्हीं दोनों के संयोग से उत्पन्न होते हैं, और वे स्वयं जगत् के उद्गम तथा लय का कारण हैं। इन दोनों प्रकृतियों का कृष्ण से संबंध अद्वैत में उनकी माया-शक्ति के रूप में, और वैष्णव परंपराओं में सगुण ईश्वर की वास्तविक शक्तियों के रूप में समझा जाता है।