हज़ारों मनुष्यों में कोई एक ही सिद्धि के लिए प्रयत्न करता है, और प्रयत्न करने वाले उन सिद्ध जनों में भी कोई विरला ही मुझे यथार्थ रूप से जान पाता है।
व्याख्या
कृष्ण ने अभी अर्जुन को ज्ञान और विज्ञान (अनुभव) पूरी तरह बताने का वचन दिया है। यहाँ वे बताते हैं कि उन्हें सच में जानना कितना दुर्लभ है: सिद्धि के लिए प्रयत्न करने वाले भी कम हैं, और उन्हें तत्त्व से जानने वाले और भी कम। सिद्धि का अर्थ परंपराएँ अलग-अलग लेती हैं, जैसे चित्त की शुद्धि, आत्मसाक्षात्कार या भक्ति; श्लोक स्वयं इसे तय नहीं करता।