मैं तुम्हें यह ज्ञान विज्ञान सहित पूरी तरह से बताऊँगा, जिसे जान लेने के बाद इस संसार में जानने योग्य और कुछ भी शेष नहीं रहता।
व्याख्या
कृष्ण अर्जुन से कह रहे हैं। पिछले श्लोक में उन्होंने वादा किया था कि अर्जुन उन्हें पूर्ण रूप से कैसे जान सकेगा, और अब वे वह शिक्षा शुरू करते हैं। यहाँ ज्ञान का अर्थ सैद्धांतिक समझ है और विज्ञान का अर्थ उसका अनुभव या गहरी विशिष्ट समझ है। शंकराचार्य विज्ञान को प्रत्यक्ष अनुभव मानते हैं, जबकि रामानुज जैसे वैष्णव आचार्य उसे ईश्वर के स्वरूप और विभूतियों की विशिष्ट समझ के रूप में लेते हैं।