वेदाहं समतीतानि वर्तमानानि चार्जुन ।भविष्याणि च भूतानि मां तु वेद न कश्चन ॥
vedāhaṃ samatītāni vartamānāni cārjuna |bhaviṣyāṇi ca bhūtāni māṃ tu veda na kaścana ||
हे अर्जुन, जो प्राणी बीत चुके हैं, जो इस समय हैं और जो आगे होंगे, उन सबको मैं जानता हूँ; परंतु मुझे कोई नहीं जानता।
व्याख्या
पिछले श्लोक में कृष्ण ने कहा कि उनकी योगमाया (दिव्य शक्ति) उन्हें अधिकांश लोगों से ढककर रखती है। यहाँ वे बताते हैं कि वे तीनों कालों के सभी प्राणियों को जानते हैं, पर उन्हें कोई नहीं जानता। 'कोई नहीं' (न कश्चन) का आशय प्रायः 'विरले ही कोई' लिया जाता है, क्योंकि 7.19 जैसे श्लोकों में दुर्लभ ज्ञानी भक्तों की चर्चा है।