संजय
ततः श्वेतैर्हयैर्युक्ते महति स्यन्दने स्थितौ । माधवः पाण्डवश्चैव दिव्यौ शङ्खौ प्रदध्मतुः ॥
tataḥ śvetairhayairyukte mahati syandane sthitau | mādhavaḥ pāṇḍavaścaiva divyau śaṅkhau pradadhmatuḥ ||
तब सफ़ेद घोड़ों से जुते हुए विशाल रथ पर खड़े माधव (कृष्ण) और पाण्डुपुत्र (अर्जुन) ने अपने दिव्य शंख बजाए।
व्याख्या संजय अंधे राजा धृतराष्ट्र को युद्धभूमि का वर्णन सुना रहे हैं। कौरव पक्ष के शंख-नगाड़ों के शोर के बाद अब पाण्डव पक्ष की बारी है। माधव (कृष्ण, मधुवंश के) और पाण्डुपुत्र अर्जुन अपने दिव्य शंख बजाकर उत्तर देते हैं, जो युद्ध के आरंभ का संकेत है।
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भगवद्गीता के बारे में
भगवद्गीता, संस्कृत में श्रीमद्भगवद्गीता (Śrīmad Bhagavad Gītā ), अर्थात् “भगवान का गीत”, महाभारत के भीष्म पर्व का एक संवाद है, जिसमें 18 अध्याय और 700 श्लोक हैं। कुरुक्षेत्र के युद्धक्षेत्र में, युद्ध आरंभ होने से ठीक पहले, अपने ही स्वजनों से लड़ने के विचार से अर्जुन का मन टूट जाता है, और उसके सारथी श्रीकृष्ण उसे उत्तर देते हैं: कर्तव्य पर, फल की आसक्ति के बिना कर्म करने पर, ज्ञान, ध्यान और भक्ति पर। संजय यह संवाद नेत्रहीन राजा धृतराष्ट्र को सुनाते हैं। इसे भगवद् गीता, भगवत गीता, श्रीमद् भगवद् गीता या श्रीमद्भगवद्गीता भी लिखा जाता है, और प्रायः केवल गीता कहा जाता है।
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