गहरी करुणा से भरा हुआ और विषाद में डूबता हुआ वह यह बोला। अर्जुन ने कहा: हे कृष्ण, युद्ध की इच्छा से यहाँ डटे हुए अपने इन स्वजनों को देखकर…
व्याख्या
संजय धृतराष्ट्र को सुनाते हुए बताते हैं कि दोनों सेनाओं में अपने संबंधियों को देखकर अर्जुन की दशा कैसी हो गई। पहले आधे भाग में संजय का वर्णन है: अर्जुन करुणा (कृपा) से भर उठा है और विषाद में डूब रहा है। दूसरे भाग से अर्जुन के अपने शब्द कृष्ण से शुरू होते हैं, और वाक्य अगले श्लोक में चलता है। इस करुणा को लेकर परंपराओं में मतभेद है: कुछ इसे अर्जुन की भलमनसाहत मानते हैं, तो कुछ इसे भ्रमित करने वाला मोह, जो उसके धर्म (कर्तव्य) की समझ को ढक देता है।