भीष्म द्वारा रक्षित हमारी वह सेना अपर्याप्त है, जबकि भीम द्वारा रक्षित इन पांडवों की यह सेना पर्याप्त है।
व्याख्या
संजय धृतराष्ट्र को बता रहे हैं कि दुर्योधन ने अपनी और पांडवों की सेना की तुलना कैसे की। यहाँ "अपर्याप्त" का सीधा अर्थ है कि सेना कम या अपूर्ण है, और "पर्याप्त" का अर्थ है कि वह काफ़ी है। कुछ व्याख्याकार इन शब्दों को उलटे अर्थ में लेते हैं: कौरव सेना असीम और पांडव सेना सीमित। वहाँ यह दुर्योधन का आत्मविश्वास माना जाता है, जबकि पहले अर्थ में उसकी चिंता झलकती है।