हे कृष्ण, अधर्म के बढ़ जाने से कुल की स्त्रियाँ दूषित हो जाती हैं; और हे वृष्णिवंशी, स्त्रियों के दूषित होने पर वर्णसंकर उत्पन्न होता है।
व्याख्या
अर्जुन युद्ध न करने के पक्ष में अपना तर्क आगे बढ़ाता है। उसके अनुसार जब कुल की परंपराएँ टूटती हैं और अधर्म (धर्म यानी उचित आचरण का उलटा) फैलता है, तो कुल की स्त्रियाँ दूषित हो जाती हैं, और इससे वर्णसंकर, यानी वर्णों का मिश्रण, पैदा होता है। यह तर्क उस समय की सामाजिक धारणाओं को दिखाता है। इसे कितना शाब्दिक लिया जाए, इस पर पाठकों और टीकाकारों में मतभेद है, पर यहाँ यह अर्जुन का अपना कथन है, कृष्ण का नहीं।