yotsyamānānavekṣe'haṃ ya ete'tra samāgatāḥ |dhārtarāṣṭrasya durbuddheryuddhe priyacikīrṣavaḥ ||
जो लोग दुर्बुद्धि धृतराष्ट्र-पुत्र को युद्ध में प्रसन्न करने की इच्छा से यहाँ इकट्ठे हुए हैं, लड़ने को तैयार उन लोगों को मैं देखना चाहता हूँ।
व्याख्या
अर्जुन अपने सारथी कृष्ण से रथ को दोनों सेनाओं के बीच रोकने को कहता है, ताकि वह देख सके कि उसे किन-किनसे लड़ना है (पिछला श्लोक)। यहाँ वह उन योद्धाओं को देखना चाहता है जो धृतराष्ट्र के "दुर्बुद्धि" पुत्र दुर्योधन का पक्ष लेने आए हैं। अभी उसके शब्दों में दृढ़ता है; उसका संशय आगे के श्लोकों में प्रकट होता है।