हे भारत (धृतराष्ट्र)! गुडाकेश (अर्जुन) के इस प्रकार कहने पर हृषीकेश (कृष्ण) ने उस उत्तम रथ को दोनों सेनाओं के बीच में लाकर खड़ा कर दिया…
व्याख्या
संजय अंधे राजा धृतराष्ट्र को युद्धभूमि का हाल सुना रहे हैं और उन्हें "भारत" (भरतवंशी) कहकर पुकारते हैं। गुडाकेश ("निद्रा को जीतने वाला" या "घने केशों वाला") अर्जुन ने कृष्ण से, जो यहाँ हृषीकेश ("इन्द्रियों के स्वामी") हैं, रथ को ऐसी जगह ले चलने को कहा था जहाँ से वे योद्धाओं को देख सकें। कृष्ण रथ को दोनों सेनाओं के बीच खड़ा कर देते हैं। यह वाक्य अगले श्लोक में आगे चलता है।