भीष्मद्रोणप्रमुखतः सर्वेषां च महीक्षिताम् ।उवाच पार्थ पश्यैतान्समवेतान्कुरूनिति ॥
bhīṣmadroṇapramukhataḥ sarveṣāṃ ca mahīkṣitām |uvāca pārtha paśyaitānsamavetānkurūniti ||
भीष्म, द्रोण और सभी राजाओं के सामने उन्होंने कहा, "हे पार्थ, यहाँ इकट्ठे हुए इन कुरुवंशियों को देखो।"
व्याख्या
संजय धृतराष्ट्र को आगे का वृत्तान्त सुना रहे हैं। सारथी बने कृष्ण ने रथ को दोनों सेनाओं के बीच, भीष्म, द्रोण और अन्य राजाओं के सामने रोक दिया है। वे अर्जुन (पार्थ, यानी पृथा या कुन्ती के पुत्र) से कहते हैं कि सामने जुटे कुरुवंशियों को देखो; यहाँ "कुरु" में दोनों पक्षों के लोग आते हैं। इसी दृश्य से आगे अर्जुन को अपने ही सगे-संबंधियों को देखकर शोक होता है।