yāvadetānnirīkṣe'haṃ yoddhukāmānavasthitān |kairmayā saha yoddhavyamasminraṇasamudyame ||
…ताकि मैं युद्ध की इच्छा से डटे हुए इन लोगों को देख सकूँ, और जान सकूँ कि इस युद्ध के उद्यम में मुझे किन-किन से लड़ना है।
व्याख्या
अर्जुन अपने सारथी कृष्ण से पिछले श्लोक में शुरू हुई अपनी बात जारी रखता है। वह रथ को दोनों सेनाओं के बीच ले चलने को कहता है, ताकि देख सके कि उसे किन योद्धाओं से लड़ना है। यही दृश्य आगे उसके मन की उलझन का कारण बनता है, जब वह अपने ही संबंधियों को वहाँ देखता है।