कुल का नाश करने वालों के इन दोषों से, जो वर्णसंकर को जन्म देते हैं, जाति और कुल के सनातन धर्म नष्ट हो जाते हैं।
व्याख्या
अर्जुन अपने ही संबंधियों से युद्ध न करने के पक्ष में तर्क दे रहे हैं। उनके अनुसार कुल के नाश से वर्णसंकर (वर्णों का मिश्रण) होता है, और इससे जाति-धर्म तथा कुल-धर्म, यानी समाज और परिवार के पुराने कर्तव्य, नष्ट हो जाते हैं। यह सामाजिक व्यवस्था के बारे में अर्जुन की अपनी समझ है। परंपराएँ इस पर भिन्न मत रखती हैं कि यह कृष्ण का भी मत है या नहीं, क्योंकि आगे कृष्ण अर्जुन के तर्क को चुनौती देते हैं।