काश्यश्च परमेष्वासः शिखण्डी च महारथः ।धृष्टद्युम्नो विराटश्च सात्यकिश्चापराजितः ॥
kāśyaśca parameṣvāsaḥ śikhaṇḍī ca mahārathaḥ |dhṛṣṭadyumno virāṭaśca sātyakiścāparājitaḥ ||
महान धनुर्धर काशिराज, महारथी शिखंडी, धृष्टद्युम्न, विराट और कभी न हारने वाले सात्यकि भी…
व्याख्या
संजय धृतराष्ट्र को युद्धभूमि का वर्णन सुना रहे हैं। वे पांडव पक्ष के उन वीरों के नाम गिना रहे हैं जिन्होंने शंख बजाए। महारथी वह योद्धा है जो अकेले अनेक रथियों से लड़ सकता है। वाक्य अगले श्लोक में जारी रहता है।