केवल उन्हीं पर करुणा करने के लिए मैं उनके अंतःकरण में स्थित होकर, ज्ञान के प्रकाशमान दीपक से अज्ञान से उपजे अंधकार को नष्ट कर देता हूँ।
व्याख्या
पिछले श्लोक में कृष्ण ने कहा कि वे भक्तों को बुद्धियोग देते हैं। यहाँ वे बताते हैं कि करुणा (अनुकम्पा) से वे उनके भीतर स्थित होकर ज्ञान के दीपक से अज्ञान का अंधकार मिटाते हैं। 'आत्मभावस्थ' का अर्थ व्याख्याकार भक्त के अंतःकरण में स्थित होना भी लेते हैं और आत्मस्वरूप में स्थित होना भी; पर सभी इसे भक्ति से मिलने वाली कृपा मानते हैं।