उच्चैःश्रवसमश्वानां विद्धि माममृतोद्भवम् ।ऐरावतं गजेन्द्राणां नराणां च नराधिपम् ॥
uccaiḥśravasamaśvānāṃ viddhi māmamṛtodbhavam |airāvataṃ gajendrāṇāṃ narāṇāṃ ca narādhipam ||
घोड़ों में मुझे अमृत से उत्पन्न उच्चैःश्रवा जानो; श्रेष्ठ हाथियों में ऐरावत, और मनुष्यों में राजा जानो।
व्याख्या
कृष्ण अर्जुन को अपनी विभूतियाँ गिनाते हुए हर वर्ग में सबसे श्रेष्ठ का उल्लेख करते हैं। उच्चैःश्रवा घोड़ा और ऐरावत हाथी प्रसिद्ध कथा के अनुसार देवताओं और असुरों द्वारा समुद्र-मंथन में अमृत के साथ प्रकट हुए थे। मनुष्यों में "नराधिप" यानी राजा है, जिसकी शक्ति और प्रजा-रक्षा का दायित्व उसे ईश्वरीय विभूति का उपयुक्त रूप बनाता है।