प्राचीन काल के सात महर्षि और उसी प्रकार चारों मनु मेरे ही भाव से युक्त थे और मेरे मन से उत्पन्न हुए। इस लोक में जो ये प्रजाएँ हैं, वे उन्हीं से उत्पन्न हुई हैं।
व्याख्या
कृष्ण बता रहे हैं कि सारी सृष्टि का मूल वे ही हैं। सात महर्षि और चार मनु, जो मानव-जाति के आदि पूर्वज माने जाते हैं, उनके मन से उत्पन्न हुए और उनके स्वभाव (भाव) से युक्त थे। "चार" से कौन अभिप्रेत हैं, इस पर टीकाकारों में मतभेद है; कुछ इन्हें चार मनु मानते हैं और कुछ चार सनकादि कुमार, पर मूल बात यही है कि सब कुछ उन्हीं से आया।