मैं सबको हर लेने वाली मृत्यु हूँ, और आगे होने वाले सबकी उत्पत्ति भी मैं ही हूँ। नारी-गुणों में मैं कीर्ति, श्री, वाणी, स्मृति, मेधा, धृति और क्षमा हूँ।
व्याख्या
कृष्ण अर्जुन को अपनी विभूतियाँ बताते हुए कहते हैं कि वे सब कुछ हर लेने वाली मृत्यु भी हैं और भविष्य में होने वाले प्राणियों के उद्भव का स्रोत भी। फिर वे सात गुण गिनाते हैं, जिन्हें परंपरा में स्त्री-रूप माना गया है: कीर्ति, श्री (समृद्धि या शोभा), वाक् (वाणी), स्मृति, मेधा (बुद्धि), धृति (धैर्य या दृढ़ता) और क्षमा।