आदित्यों में मैं विष्णु हूँ, प्रकाशमान पिंडों में किरणों से दीप्त सूर्य हूँ; मरुतों में मैं मरीचि हूँ और नक्षत्रों में चंद्रमा हूँ।
व्याख्या
कृष्ण अर्जुन को अपनी दिव्य विभूतियाँ गिना रहे हैं और हर वर्ग में सबसे श्रेष्ठ का नाम ले रहे हैं। यहाँ बारह आदित्यों (सूर्य-देवताओं) में विष्णु, ज्योतियों में सूर्य, मरुतों (वायु-देवताओं) में मरीचि और नक्षत्रों में चंद्रमा बताए गए हैं। भाव यह है कि ईश्वर की झलक हर वर्ग की सबसे उत्कृष्ट वस्तु में सबसे स्पष्ट दिखती है।