पवित्र करने वालों में मैं वायु हूँ, और शस्त्र धारण करने वालों में मैं राम हूँ। जल-जंतुओं में मैं मकर हूँ, और बहती नदियों में मैं जाह्नवी (गंगा) हूँ।
व्याख्या
कृष्ण अर्जुन को अपनी विभूतियाँ (श्रेष्ठ रूप) गिनाते जा रहे हैं, ताकि वह संसार में दिव्यता को पहचान सके। यहाँ वे वायु, आदर्श योद्धा-राजा राम, मकर (पौराणिक जल-जीव, जिसे मगरमच्छ या शार्क माना जाता है) और जाह्नवी यानी गंगा का नाम लेते हैं। "पवताम्" का अर्थ कुछ टीकाकार "पवित्र करने वाले" और कुछ "वेग से चलने वाले" करते हैं; दोनों अर्थ इस श्लोक में बैठते हैं।