छल करने वालों में मैं जुआ हूँ, और तेजस्वियों में मैं तेज हूँ। मैं विजय हूँ, मैं दृढ़ निश्चय हूँ, और सात्त्विक जनों में मैं सत्त्व हूँ।
व्याख्या
कृष्ण अर्जुन को अपनी विभूतियाँ बताते हुए हर श्रेणी में सबसे प्रमुख रूप का नाम लेते हैं। जुआ छल की शक्ति का प्रतीक है, जबकि तेज, विजय, दृढ़ निश्चय (व्यवसाय) और सत्त्व (तीन गुणों में निर्मल, प्रकाशमय गुण) में वे श्रेष्ठता के रूप में प्रकट होते हैं। जुए का उल्लेख प्रायः इस अर्थ में समझा जाता है कि उनकी शक्ति हर चीज़ में काम करती है; इसे जुए का समर्थन नहीं माना जाता।