बुद्धि, ज्ञान, मोह से मुक्ति, क्षमा, सत्य, इंद्रियों का संयम, मन की शांति, सुख और दुख, उत्पत्ति और विनाश, भय और अभय भी…
व्याख्या
कृष्ण बता रहे हैं कि सभी प्राणियों का स्रोत वे ही हैं, और वे उन अनेक भावों की सूची शुरू करते हैं जो उनसे उत्पन्न होते हैं। इस श्लोक में बुद्धि, ज्ञान, क्षमा, दम (इंद्रिय-संयम) और शम (मन की शांति) के साथ सुख, दुख, जन्म, मृत्यु और भय भी गिनाए गए हैं। सूची अगले श्लोक में जारी रहती है, जहाँ वे कहते हैं कि ये सब भाव उन्हीं से उत्पन्न होते हैं।