सब वृक्षों में मैं अश्वत्थ (पीपल) हूँ, देवर्षियों में नारद हूँ, गन्धर्वों में चित्ररथ हूँ और सिद्धों में मुनि कपिल हूँ।
व्याख्या
कृष्ण अर्जुन को अपनी विभूतियाँ गिना रहे हैं, यानी हर वर्ग में जो सबसे श्रेष्ठ है, वह वे स्वयं हैं। अश्वत्थ पवित्र पीपल का वृक्ष है, नारद देवताओं के ऋषि हैं, गन्धर्व स्वर्ग के गायक-वादक हैं जिनमें चित्ररथ प्रमुख हैं, और सिद्ध सिद्धि पाए हुए पुरुष हैं जिनमें कपिल मुनि श्रेष्ठ हैं। कपिल को परम्परा से सांख्य दर्शन से जोड़ा जाता है, पर टीकाकार इस पर एकमत नहीं कि यहाँ कौन-से कपिल अभिप्रेत हैं।