शस्त्रों में मैं वज्र हूँ; गायों में मैं कामधेनु हूँ। संतान की उत्पत्ति कराने वाला कामदेव (कंदर्प) मैं हूँ; और सर्पों में मैं वासुकि हूँ।
व्याख्या
अर्जुन को अपनी विभूतियाँ बताते हुए कृष्ण हर वर्ग की सबसे श्रेष्ठ वस्तु गिनाते हैं: इंद्र का वज्र, इच्छाएँ पूरी करने वाली कामधेनु, संतानोत्पत्ति की ओर ले जाने वाला काम (कंदर्प), और सर्पों का राजा वासुकि। भाव यह है कि हर वर्ग में जो सर्वोत्तम है, उसमें उनकी शक्ति प्रकट होती है; यहाँ केवल संतान-उत्पत्ति के लिए काम की बात है, हर प्रकार की इच्छा की नहीं।