अहमात्मा गुडाकेश सर्वभूताशयस्थितः ।अहमादिश्च मध्यं च भूतानामन्त एव च ॥
ahamātmā guḍākeśa sarvabhūtāśayasthitaḥ |ahamādiśca madhyaṃ ca bhūtānāmanta eva ca ||
हे गुडाकेश, मैं सब प्राणियों के हृदय में स्थित आत्मा हूँ। मैं ही सब प्राणियों का आदि हूँ, मध्य हूँ और अंत भी मैं ही हूँ।
व्याख्या
कृष्ण ने अभी अपनी दिव्य विभूतियाँ बताने का वचन दिया है, और वे सबसे निकट की विभूति से आरंभ करते हैं: हर प्राणी के हृदय में बसने वाली आत्मा। फिर वे कहते हैं कि सब प्राणियों का आदि, मध्य और अंत वे ही हैं, अर्थात सृष्टि, स्थिति और लय सब उन्हीं पर आधारित हैं। गुडाकेश अर्जुन का नाम है, जिसका अर्थ प्रायः 'निद्रा को जीतने वाला' या 'घने केशों वाला' किया जाता है।