नागों में मैं अनन्त हूँ और जलचरों में वरुण हूँ। पितरों में मैं अर्यमा हूँ और नियंत्रण करने वालों में यम हूँ।
व्याख्या
कृष्ण अर्जुन को अपनी दिव्य विभूतियाँ बता रहे हैं और हर वर्ग में सबसे श्रेष्ठ का नाम ले रहे हैं। अनन्त नागों के राजा हैं, वरुण जल के अधिपति हैं, अर्यमा पितरों के प्रमुख हैं, और यम प्राणियों को नियंत्रण में रखने और दण्ड देने वाले देवता हैं, जो मृत्यु के बाद न्याय करते हैं। भाव यह है कि हर श्रेणी की सर्वोच्च अभिव्यक्ति में परमात्मा ही प्रकट है।