धुआँ, रात्रि, कृष्ण पक्ष और सूर्य के दक्षिणायन के छह महीने—इस मार्ग से जाने वाला योगी चंद्रमा की ज्योति को पाकर फिर लौट आता है।
व्याख्या
कृष्ण यहाँ मृत्यु के बाद आत्मा के दो मार्गों में से दूसरा मार्ग बताते हैं। इसके चिह्न हैं धुआँ, रात, कृष्ण पक्ष और सूर्य का दक्षिणायन। इस मार्ग से जाने वाला चंद्रलोक की ज्योति तक पहुँचकर फिर जन्म लेने लौटता है। कुछ परंपराएँ इन शब्दों को मार्ग के अधिष्ठाता देवता मानती हैं, तो कुछ मृत्यु का समय; श्लोक स्वयं इसका निर्णय नहीं करता।