जो लोग जानते हैं कि ब्रह्मा का एक दिन हज़ार युगों तक चलता है और उनकी रात भी हज़ार युगों में समाप्त होती है, वही लोग दिन और रात को सचमुच जानते हैं।
व्याख्या
पिछले श्लोक में कृष्ण ने कहा कि ब्रह्मलोक तक के सभी लोकों से लौटना पड़ता है, पर उन्हें पाने वाले का पुनर्जन्म नहीं होता। यहाँ वे सृष्टिकर्ता ब्रह्मा के समय का पैमाना बताते हैं: हज़ार युगों (युग = काल-खंड) का एक दिन और उतनी ही लंबी रात। भाव यह है कि इतने विशाल कालखंड भी सीमित हैं, इसलिए ऊँचे से ऊँचे लोक भी अंतिम नहीं हैं।