तस्मात्सर्वेषु कालेषु मामनुस्मर युध्य च ।मय्यर्पितमनोबुद्धिर्मामेवैष्यस्यसंशयम् ॥
tasmātsarveṣu kāleṣu māmanusmara yudhya ca |mayyarpitamanobuddhirmāmevaiṣyasyasaṃśayam ||
इसलिए हर समय मेरा स्मरण करो और युद्ध भी करो। मन और बुद्धि मुझे अर्पित कर देने पर तुम निःसंदेह मुझी को प्राप्त होगे।
व्याख्या
पिछले श्लोक के निष्कर्ष के रूप में कृष्ण कहते हैं कि अंत समय का भाव ही गति तय करता है, इसलिए उनका स्मरण केवल मृत्यु के समय नहीं, हर समय करना चाहिए। वे अर्जुन से कहते हैं कि इसके लिए अपना क्षत्रिय-धर्म छोड़ना नहीं है; मन और बुद्धि कृष्ण को अर्पित रखकर वह युद्ध कर सकता है। अनेक परंपराएँ इसे भीतर की भक्ति और बाहरी कर्म का मेल मानती हैं, पर इस पर मतभेद है कि जोर भक्ति पर है या ज्ञान पर।