हे पुरुषोत्तम! वह ब्रह्म क्या है, अध्यात्म क्या है और कर्म क्या है? अधिभूत किसे कहा गया है, और अधिदैव किसे कहते हैं…
व्याख्या
सातवें अध्याय के अंत में कृष्ण ने कुछ पारिभाषिक शब्द कहे थे; उन्हीं से प्रेरित होकर अर्जुन आठवाँ अध्याय प्रश्नों से शुरू करता है। वह पूछता है कि ब्रह्म (परम सत्य), अध्यात्म (जीव या भीतरी आत्म-तत्त्व), कर्म, अधिभूत (नश्वर प्राणियों का क्षेत्र) और अधिदैव (दिव्य नियामक तत्त्व) से क्या अभिप्राय है। यह प्रश्न अगले श्लोक में जारी रहता है।