दिन के आने पर सारे व्यक्त रूप अव्यक्त से प्रकट होते हैं, और रात के आने पर वे उसी अव्यक्त नामक तत्त्व में फिर लीन हो जाते हैं।
व्याख्या
पिछले श्लोक में बताए गए ब्रह्मा के दिन और रात का वर्णन कृष्ण यहाँ आगे बढ़ाते हैं। ब्रह्मा का दिन शुरू होते ही दिखने वाला जगत अव्यक्त (अदृश्य मूल स्रोत) से प्रकट होता है, और रात होते ही उसी में लौट जाता है। यहाँ अव्यक्त क्या है, इस पर परंपराएँ भिन्न हैं: कुछ इसे मूल प्रकृति मानती हैं, कुछ ब्रह्मा की अपनी अव्यक्त अवस्था।