हे पार्थ, पापयोनि में जन्मे लोग, स्त्रियाँ, वैश्य और शूद्र — ये सभी भी मेरा आश्रय लेकर परम गति को प्राप्त होते हैं।
व्याख्या
कृष्ण अर्जुन से कह रहे हैं कि जो भक्त उनकी शरण लेता है, उसका नाश नहीं होता। यहाँ वे बताते हैं कि परम गति, यानी सर्वोच्च लक्ष्य मोक्ष, जन्म या सामाजिक वर्ग से बँधी नहीं है। "पापयोनि" उस समय की सामाजिक मान्यता के अनुसार निम्न माने गए जन्म को कहा गया है। कुछ टीकाकार इसे स्त्रियों, वैश्यों और शूद्रों का विशेषण मानते हैं, तो कुछ इसे एक अलग वर्ग के रूप में पढ़ते हैं।