इदं तु ते गुह्यतमं प्रवक्ष्याम्यनसूयवे ।ज्ञानं विज्ञानसहितं यज्ज्ञात्वा मोक्ष्यसेऽशुभात् ॥
idaṃ tu te guhyatamaṃ pravakṣyāmyanasūyave |jñānaṃ vijñānasahitaṃ yajjñātvā mokṣyase'śubhāt ||
तुझ जैसे दोष न देखने वाले को मैं यह अत्यंत गोपनीय ज्ञान, अनुभव सहित, अब बताऊँगा। इसे जानकर तू अशुभ से मुक्त हो जाएगा।
व्याख्या
नौवें अध्याय के आरंभ में कृष्ण अर्जुन को अनसूयु, यानी दोष न निकालने और ईर्ष्या न रखने वाला, कहकर गहन उपदेश के योग्य बताते हैं। वे ज्ञान के साथ प्रत्यक्ष अनुभव (विज्ञान) देने का वचन देते हैं। अनेक टीकाकार 'अशुभ' का अर्थ संसार का बंधन मानते हैं, और यहाँ उससे मोक्ष का आश्वासन है।