कुछ दूसरे लोग इस प्रकार स्वयं नहीं जानते, पर दूसरों से सुनकर उपासना करते हैं। वे भी, जो सुने हुए वचनों में पूरी तरह निष्ठा रखते हैं, निश्चय ही मृत्यु को पार कर जाते हैं।
व्याख्या
पिछले श्लोक में कृष्ण ने आत्म-साक्षात्कार के मार्ग गिनाए: ध्यान, सांख्य (ज्ञान) और कर्मयोग। यहाँ वे एक और वर्ग बताते हैं, जो स्वयं यह तत्त्व नहीं जानता, पर गुरुजनों से सुनकर (श्रुति) श्रद्धा से साधना करता है। कृष्ण अर्जुन को आश्वस्त करते हैं कि ऐसे लोग भी मृत्यु, यानी जन्म-मरण के चक्र, को पार कर जाते हैं।