मान का अभाव, दम्भ का अभाव, अहिंसा, क्षमा, सरलता, गुरु की सेवा, पवित्रता, स्थिरता, आत्म-संयम…
व्याख्या
क्षेत्र (शरीर और मन) का वर्णन करने के बाद कृष्ण यहाँ उन गुणों की सूची शुरू करते हैं जिन्हें वे ज्ञान कहते हैं, और यह सूची अगले श्लोकों में भी चलती है। इस भाग में विनम्रता, दिखावे का अभाव, अहिंसा, क्षमा, सरलता, गुरु की सेवा, भीतर-बाहर की शुचिता (शौच), स्थिरता और आत्म-संयम आते हैं। परंपराओं में मतभेद है कि ये गुण स्वयं ज्ञान हैं या आत्मज्ञान की तैयारी कराने वाली नींव।