ज्ञानी भी अपनी ही प्रकृति के अनुरूप आचरण करता है। सभी प्राणी अपनी प्रकृति का ही अनुसरण करते हैं; ऐसे में दमन भला क्या कर पाएगा?
व्याख्या
कृष्ण अर्जुन को समझा रहे हैं कि लोग जैसा आचरण करते हैं, वैसा क्यों करते हैं। यहाँ प्रकृति का अर्थ जन्मजात प्रवृत्तियाँ हैं, जो तीन गुणों (सत्त्व, रजस्, तमस् के स्वभाव) से बनती हैं और ज्ञानी तक को प्रभावित करती हैं। इसलिए केवल बलपूर्वक दमन (निग्रह) बहुत काम नहीं आता। व्याख्याकार यहाँ अलग-अलग पढ़ते हैं: कुछ इसे प्रकृति से लड़ने के बजाय अनुशासन से दिशा देने का संकेत मानते हैं, और कुछ इसे प्रकृति की प्रबलता पर बल मानते हैं, जिसे अगले श्लोक के अनुसार सही उपाय से सँभालना है।